झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड ने एक गलती को सही सिद्ध करने के लिए एक और गलती करने की ठान ली है। बिप्स की कार्यक्षमता के प्रभावी अध्ययन के बिना उसे स्पॉट बिलिंग का काम तो दे ही दिया गया अब एजेंसी को सफल बनाने के लिए बोर्ड की ओर से निर्धारित मानक ही कम किया जा रहा है। एजेंसी को फरवरी में जहां 95,000 उपभोक्ताओं के स्पॉट बिलिंग का निर्देश दिया था वहीं मार्च में मात्र चालीस हजार उपभोक्ताओं के स्पॉट बिलिंग की बात कही गई है।
आखिर क्यों? चलिए... देर ही सही, शायद बोर्ड ने एजेंसी की सही क्षमता की पहचान ली। वैसे कार्यादेश के अनुसार मार्च से एजेंसी को शतप्रतिशत उपभोक्ताओं (1.60 लाख) की स्पॉट बिलिंग करनी थी। बोर्ड ने एजेंसी को मार्च बीस तक सभी उपभोक्ताओं को बिल दे उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश भी दिया है।
किस अपराधी को तलाश रहा बोर्ड
बोर्ड ने सड़क पर बिल फेंके होने के लिए दोषी अधिकारी को चिह्नित करने की बात कही है। उपभोक्ता के विश्वास बहाली के लिए यह बेहद जरूरी है लेकिन इस निर्देश में भी दोषी एजेंसी को बचाने की बू आ रही है। मूल प्रश्न तो यह है कि एजेंसी ने फरवरी माह का बिल फरवरी में बांटा क्यों नहीं? बिल फेंकने के दोषी तो जरूर चिह्नित हों लेकिन बिल नहीं बांटने वालों का टारगेट कम कर किसे पुरस्कृत किया जा रहा है?
क्या यही है स्पॉट बिलिंग
एजेंसी ने इस बार तत्परता दिखाते हुए काम भी शुरू कर दिया है। इतने निदैश-आदेश के बावजूद स्पॉट बिलिंग के नाम पर आंख में धूल झोंका जा रहा है। एजेंसी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर तो जा रहे हैं लेकिन मीटर की फोटो व रीडिंग ले बिना बिल दिए लौट रहे हैं। पूछने पर कहते हैं बिल 20 मार्च तक मिलेगा। क्या यही स्पॉट बिलिंग है, स्पॉट बिलिंग में मीटर रीडिंग के साथ ही बिजली बिल दे देना है और मिले तो चेक से बिल की राशि भी ले लेना है।
कई शिकायत
स्पॉट बिलिंग के नाम लोगोंं के आंख जो धूल झोंका जा रहा है इसके खिलाफ कई उपभोक्ताओं ने फोन कर जानकारी दी है।
1.
मीटर रीडिंग और फोटो ले चले गए हैं लेकिन बिल नहीं दिया। बोले बीसको देंगे।
शोभा कुमारी, निवारणपुर,
बुक नं. :: बी 27/ डीआर 2838
2. मीटर रीडिंग कर चले गए बिल दिया ही नहीं, सुना था स्पॉट बिलिंग में रीडिंग के साथ बिल देंगे।
मोहन सिंह, निवारणपुर
बुक नं. :: बी 40/ डीआर 422
ऐसी ही शिकायत कडरू की सादिया खातून बुक नं. एजी06/ केएडी 588, सी केरकेट्टा-कडरू, बुक नं. एजी06/ केएडी 117, मो. कलीम-कडरू बुक नं. एजी06/ केएडी 7781, डा. रत्नेश 10ए, ओल्ड एजी कॉलोनी केएडी 476 ने की है।
आखिर क्यों? चलिए... देर ही सही, शायद बोर्ड ने एजेंसी की सही क्षमता की पहचान ली। वैसे कार्यादेश के अनुसार मार्च से एजेंसी को शतप्रतिशत उपभोक्ताओं (1.60 लाख) की स्पॉट बिलिंग करनी थी। बोर्ड ने एजेंसी को मार्च बीस तक सभी उपभोक्ताओं को बिल दे उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश भी दिया है।
किस अपराधी को तलाश रहा बोर्ड
बोर्ड ने सड़क पर बिल फेंके होने के लिए दोषी अधिकारी को चिह्नित करने की बात कही है। उपभोक्ता के विश्वास बहाली के लिए यह बेहद जरूरी है लेकिन इस निर्देश में भी दोषी एजेंसी को बचाने की बू आ रही है। मूल प्रश्न तो यह है कि एजेंसी ने फरवरी माह का बिल फरवरी में बांटा क्यों नहीं? बिल फेंकने के दोषी तो जरूर चिह्नित हों लेकिन बिल नहीं बांटने वालों का टारगेट कम कर किसे पुरस्कृत किया जा रहा है?
क्या यही है स्पॉट बिलिंग
एजेंसी ने इस बार तत्परता दिखाते हुए काम भी शुरू कर दिया है। इतने निदैश-आदेश के बावजूद स्पॉट बिलिंग के नाम पर आंख में धूल झोंका जा रहा है। एजेंसी के कर्मचारी उपभोक्ताओं के घर तो जा रहे हैं लेकिन मीटर की फोटो व रीडिंग ले बिना बिल दिए लौट रहे हैं। पूछने पर कहते हैं बिल 20 मार्च तक मिलेगा। क्या यही स्पॉट बिलिंग है, स्पॉट बिलिंग में मीटर रीडिंग के साथ ही बिजली बिल दे देना है और मिले तो चेक से बिल की राशि भी ले लेना है।
कई शिकायत
स्पॉट बिलिंग के नाम लोगोंं के आंख जो धूल झोंका जा रहा है इसके खिलाफ कई उपभोक्ताओं ने फोन कर जानकारी दी है।
1.
मीटर रीडिंग और फोटो ले चले गए हैं लेकिन बिल नहीं दिया। बोले बीसको देंगे।
शोभा कुमारी, निवारणपुर,
बुक नं. :: बी 27/ डीआर 2838
2. मीटर रीडिंग कर चले गए बिल दिया ही नहीं, सुना था स्पॉट बिलिंग में रीडिंग के साथ बिल देंगे।
मोहन सिंह, निवारणपुर
बुक नं. :: बी 40/ डीआर 422
ऐसी ही शिकायत कडरू की सादिया खातून बुक नं. एजी06/ केएडी 588, सी केरकेट्टा-कडरू, बुक नं. एजी06/ केएडी 117, मो. कलीम-कडरू बुक नं. एजी06/ केएडी 7781, डा. रत्नेश 10ए, ओल्ड एजी कॉलोनी केएडी 476 ने की है।
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