Wednesday, August 24, 2016

स्वतंत्रता के दिन अंतिम प्रणाम कह चल दिए डॉ. केशरी

स्मृति शेष  क्रासर : रांची विवि में जनजातीय भाषा विभाग खुलवाने में निभाया निर्णायक भूमिका  झारखंड आंदोलन को बौद्धिक आधार देने में खपा दिया जीवन
रांची : इधर स्वतंत्रता दिवस की तैयारी चल रही है उधर झारखंड आंदोलन के बौद्धिक अगुआ डॉ बीपी केशरी ने लोगों को अंतिम प्रणाम कहा। रविवार देर इलाज के क्रम में रांची के मेडिका अस्पताल में उनकी मौत हो गई। झारखंड के सांस्कृतिक। राजनीतिक मंच पर उन्हें बेहद सम्मानीय स्थान प्राप्त रहा।
सच कहें तो झारखंड के इतिहास में जो स्थान आदिवासी नेताओं ने जयपाल सिंघ मुंडा व रामदयाल मुंडा को हासिल है कुछ वैसा ही स्थान सदान नेताओं में डॉ. बिसेश्वर प्रसाद केशरी का रहा है। झारखंड की अलग अस्मिता व पहचान की जो लड़ाई आदिवासी महासभा के नेतृत्व में छेड़ी गई थी, उसे झारखंड आंदोलन के चरम में बौद्धिक आधार देने का काम डॉ. बीपी केशरी ने किया था। झारखंड के आदिवासी-मूलवासी नेताओं के सर्वमान्य बौद्धिक अगुआ के रूप में ख्यात डॉ केशरी को झारखंड के हवा, पहाड़, भाषा और संस्कृति और लोगों से बेहद गहरा लगाव था। वह जानते थे कि झारखंड की पहचान के लिए इसकी भाषा-संस्कृति को वैज्ञानिक आधार देना जरूरी है। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने अथक प्रयास कर 1982 में रांची विवि में जनजातीय भाषा विभाग की स्थापना कराई। इस बौद्धिक उपलब्धि को सर्वमान्य आधार देने के लिए उन्होंने डॉ राम दयाल मुंडा को अमेरिका से विभग की अगुवाई करने के बुलाया। डा. मुंडा उनके आग्रह को अस्वीकार नहीं कर सके और अमेरिका में बेहतर करियर छोड़ रांची आ गए। डा. केसरी मूलत: साहित्यकार थे, उन्होंने कई साहित्यिक ग्रंथों की रचना तो की ही। राज्य के विभिन्न भागोंं में रहने वाले, वर्षों से बिसरा दिए गए झारखंडी साहित्यकारों को ढूंढ कर उनकी रचनाओं को संग्रहित कर उन्होंने ऐतिहासिक काम किया। इस काम में उन्होंने चालीस वर्ष लगाए और कई झारखंडी भाषाओं के तीस हजार से ज्यादा रचनाओं को संग्रहित किया।
कभी डॉ. केशरी ने बताया था कि 1957 में आकाशवाणी की स्थापना हुई। इसके तीन साल बाद 1960 में रांची विवि की। इससे नागपुरी जगत में हलचल हुई। 1960 में ही नागपुरी भाषा परिषद का गठन भी हुआ। नागपुरी पत्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ। इससे काम आसान हुआ। कई लेख इसमें छपे। गीतों के संग्रह में भी आसानी हुई। 1964-65 में नागपुरी क्षेत्र का व्यापक दौरा किया। नागपुरी जानने वालों से संपर्क किया, साक्षात्कार लिया। पांच सौ नए-पुराने कवियों के लगभग 15000 गीत मिले। काम को आगे बढ़ाने के लिए 1967 में एक पुस्तिका छपाई नगपुरिया कविमनक सूची। धीरे-धीरे काम बढ़ रहता रहा जो जीवन के अंतिम दिनों तक चलता रहा। 

अब सौर ऊर्जा से रोशन होगा प्रोजेक्ट भवन व पुलिस मुख्यालय


 रांची : राजधानी के कई प्रमुख सरकारी भवन अब सौर ऊर्जा से रोशन होंगे। प्रोजेक्ट भवन, पुलिस मुख्यालय, समाहरणालय भवन, मुख्यमंत्री सचिवालय व रिम्स जैसे संस्थानों में गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोत से बिजली उत्पादित कर इन्हें रोशनी देने की प्रक्रिया पूरी कर ली गयी है। प्रोजेक्ट भवन में 135 किलोवाट क्षमता, पुलिस मुख्यालय में 70 किलोवाट क्षमता, समहरणालय में 125 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा पैनल और कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने सभी सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कर बिजली की जरूरत पूरा करने का निर्देश दिया है। इसके अंतर्गत ही झारखंड के कई भवनों में इसकी स्थापना की जा रही है।
राजधानी सहित कई जिलों के सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की शुरुआत कर दी गयी है। यह काम झारखंड गैर पारंपरिक विकास प्राधिकार (जेरेडा) से सूचिबद्ध कंपनियां कर रही हैं। राजधानी के  अधिकतर सरकारी भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम एसजी इंटरप्राइजेज कर रही है।
पहले चरण में सदर अस्पताल और राज्य के सभी समाहरणालय भवनों और सदर अस्पतालों में गैर पारंपरिक ऊर्जा संयंत्र लगाने का काम लिया गया है। इतना ही नहीं झारखंड हाईकोर्ट में भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है। सौर ऊर्जा से जुड़े पैनल, बैटरियां, कंट्रोल रूम के सामान वगैरह हाईकोर्ट परिसर में आ चुके हैं। सरकार की तरफ  से सदर अस्पताल डालटनगंज, गढ़वा के समहरणालय भवन, सदर अस्पताल, चाईबासा और हजारीबाग में भी सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित कराने का काम चल रहा है। संयंत्र की स्थापना में एजेंसी को दो से तीन माह का वक्त लगता है।
कैसे काम करेगा संयंत्र
संयंत्र को बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए रखा गया है, इसके लिए एक कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां दो-दो वोल्ट की बैटरियों को एसी अल्टरनेटिव करेंट में कनवर्ट करने के लिए रखा गया है। चुंकि सौर ऊर्जा से डीसी डायरेक्ट करेंट प्राप्त होती है।  इसलिए इसे एसी वोल्ट में बदल कर आपूर्ति की जाती है। 135 किलोवाट क्षमता के प्लांट से बड़े भवनों में चार से पांच घंटे तक  बिजली की अबाधित आपूर्ति की जा सकती है। 

सेना जमीन घोटाला : जांच में सहयोगी अधिकारी से होगी पूछताछ


2001 के बाद के सभी अंचलाधिकारियों, सीआइ व राजस्वकर्मियों से पूछताछ का दिया निर्देश

क्रासर : जिनके नाम से है जमाबंदी व विक्रेता सभी से होगी पूछताछ

 क्रासर : नामकुम पहुंचे एसीबी एसपी, अंचलकर्मियों से चार घंटे तक किया पूछताछ

 क्रासर : पूछा 152 जमाबंदी में मात्र तीस ही मामले क्यों दिए गए

रांची : नामकुम सेना जमीन घोटाले में जांच की दिशा को सही करने का प्रयास शुरू हो गया है। मंगलवार को राज्य की मुख्यसचिव राजबाला वर्मा के निर्देश के बाद एसीबी के आइजी मुरारी लाल मीणा ने जांच को ले सख्त रुख अपना लिया। उनके निर्देश पर एसीबी एसपी निरंजन नामकुम अंचल कार्यालय भेजा। यहां एसपी ने अब तक जांच में अहम भूमिका निभा रहे नामकुम के अंचल निरीक्षक अनिलकुमार को पूछताछ के लिए बुधवार को एसीबी के कार्यालय बुलाया।
मालूम हो कि नामकुम की पूर्व अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुड्डू ने इसी अधिकारी पर अपने रिपोर्ट में दर्ज आरोपियों की सूची से खुद का नाम हटा जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया था।
एसीबी एसपी निरंजन ने 2001 से 2016 तक अंचल में पदस्थापित रहे सभी अंचलाधिकारियों, सीओ व राजस्व कर्मचारी की जानकारी ली व उन्हें नोटिस देकर पूछताछ करने का निर्देश दिया। इसके साथ-साथ जमीन के सभी जमाबंदी धारक व विक्रेता को भी नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाने को कहा। एसपी ने पूछा कि 152 लोगों को 15 एकड़ 88 डिसमिल जमीन की जमाबंदी हुई तो जांच के लिए महज 30 जमाबंदी के मामले क्यों दिए गए। आखिर क्यों और किसके कहने पर 122 जमाबंदी के मामले को जांच से मुक्त रखा गया।
अंचल कार्यालय में पूछताछ के बाद एसीबी एसपी निरंजन केस के अनुसंधान पदाधिकारी उपेंद्र राय व नामकुम के वर्तमान अंचलाधिकारी मनोज कुमार, बीडीओ गौरी शंकर शर्मा (जिन्होंने घोटाले को लेकर नामकुम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है), आरोपी सीआइ अनिल कुमार व राजस्व कर्मचारी अशोक सिंह के साथ स्थल निरीक्षण करने तुंबागुटू गए। वहां उन्होंने जमीन पर कब्जे का मुआयना किया। इस दौरान एसपी निरंजन ने सीओ से पूछा कि इतने बड़ा घोटाला आखिर हुआ कैसे, सीओ व सीआइ इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने जमीन जमाबंदी की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी।

कोट
सेना जमीन भूमि घोटाले में जांच की दिशा की जानकारी लेने के लिए नामकुम अंचल कार्यालय गया था। इसके आगे मैं कुछ नहीं जानता।
निरंजन, एसपी, एसीबी  

सेना जमीन घोटाले की जांच में पड़ रही आंच


- कुल 152 लोगों को 15 एकड़ 88 डिस्मिल जमीन की हुई जमाबंदी  - जांच के लिए एसीबी को दिये गये हैं मात्र 30 जमाबंदी की कॉपी  - 122 म्यूटेशन को जांच से आरोपी सर्कल इंस्पेक्टर ने रखा मुक्त

रांची : तुंबागुटू में सेना की जमीन की अवैध बिक्री व जमाबंदी के चर्चित मामले में रोज नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस संबंध में राष्ट्रपति के संज्ञान लेने के बाद झारखंड सरकार रेस हुई और जांच ने रफ्तार पकड़ी। जागरण के हाथ लगे दस्तावेज बता रहे हैं कि जिस प्रभारी अंचल निरीक्षक
(सीआइ) को नामकुम के तत्कालीन अंचलाधिकारी ने जांच के बाद आरोपी बताया था फिलहाल एसीबी जांच में वही सहयोग कर रहा। नामकुम की तत्कालीन अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुडू का कहना है कि मेरे जांच रिपोर्ट में छेड़छाड़ कर एक प्रभारी अंचल निरीक्षक अनिल कुमार ने अपना नाम हटाने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को सौंपा, अब इसी आधार पर जांच कार्य चल रहा है। इससे जांच की दिशा  प्रभावित हो रही है। जान बूझकर उक्त आरोपी ने 152 में से मात्र 30 जमाबंदी के दस्तावेज एसीबी को सौंपा है, ताकि जांच में उस पर आंच न आए। हद तो यह हो गई कि 2014 में मामला प्रकाश में आने के बाद उक्त सीआइ अनिल कुमार द्वारा खाता नंबर 93 प्लाट नंबर 1574 के दर्जनों जमाबंदी पंजी टू में दर्ज कराई गई। अब जब नामकुम थाने से जांच के लिए मामला एसीबी को सौंपा गया है, तो उक्त आरोपी ही स्थल निरीक्षण कराने के साथ टीम को दस्तावेज मुहैया करा रहा है।

उपायुक्त ने मांगा था आरोप पत्र

सेना जमीन घोटाले के संबंध में झारखंड सरकार के निर्देश के बाद उपायुक्त रांची ने 31 मार्च को (पत्रांक 501) नामकुम अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुडू को पत्र लिखा था।  इसमें तुंबागुटू मौजा के खाता नंबर 8, 98, 108 व 97 में सेना भूमि के गलत नामांतरण की अनुशंसा करने वाले राजस्व कर्मचारी व अंचल निरीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए आरोप पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके आलोक में अंचलाधिकारी ने जांच के बाद राजस्व कर्मचारी मनोरथ भगत, जयंत विजय टोप्पो, पालन राम पांडेय(सेवानिवृत्त), प्रभारी अंचल निरीक्षक (सीआइ) धनंजय गुप्ता तथा राजस्व कर्मचारी सह तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अनिल कुमार पर विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की।
 रिपोर्ट भेजने के क्रम में हुई गड़बड़ी

सीओ द्वारा तैयार रिपोर्ट को उपायुक्त के पास भेजने के क्रम में इस रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ हुई और अनिल कुमार का नाम हटाने के बाद मात्र चार आरोपियों का नाम भेजा गया। इस तरह पांच आरोपी के बदले अब मात्र चार आरोपी रह गए और इसी आधार पर आगे की कार्रवाई बढ़ी। जिसमें एक राजस्व कर्मचारी जयंत विजय टोप्पो व तत्कालीन प्रभारी सीआई धनंजय गुप्ता के ऊपर विभागीय कार्रवाई हुई। अन्य आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कोट
मैंने जांच रिपेार्ट में उपयुक्त को पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा था। लेकिन, रिपोर्ट में छेड़छाड़ की गई और एक नाम हटा दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए कि किसने नाम हटाया।
कुमुदिनी टुडू, तत्कालीन अंचलाधिकारी नामकुम
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सेना की जमीन के मामले में जिसने भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की है, किसी भी कीमत पर उसे बख्शा नहीं जाएगा, कड़ी कार्रवाई होगी।
भू-राजस्व मंत्री, अमर बाउरी