2001 के बाद के सभी अंचलाधिकारियों, सीआइ व राजस्वकर्मियों से पूछताछ का दिया निर्देश
क्रासर : जिनके नाम से है जमाबंदी व विक्रेता सभी से होगी पूछताछ
क्रासर : नामकुम पहुंचे एसीबी एसपी, अंचलकर्मियों से चार घंटे तक किया पूछताछ
क्रासर : पूछा 152 जमाबंदी में मात्र तीस ही मामले क्यों दिए गए
रांची : नामकुम सेना जमीन घोटाले में जांच की दिशा को सही करने का प्रयास शुरू हो गया है। मंगलवार को राज्य की मुख्यसचिव राजबाला वर्मा के निर्देश के बाद एसीबी के आइजी मुरारी लाल मीणा ने जांच को ले सख्त रुख अपना लिया। उनके निर्देश पर एसीबी एसपी निरंजन नामकुम अंचल कार्यालय भेजा। यहां एसपी ने अब तक जांच में अहम भूमिका निभा रहे नामकुम के अंचल निरीक्षक अनिलकुमार को पूछताछ के लिए बुधवार को एसीबी के कार्यालय बुलाया।
मालूम हो कि नामकुम की पूर्व अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुड्डू ने इसी अधिकारी पर अपने रिपोर्ट में दर्ज आरोपियों की सूची से खुद का नाम हटा जांच प्रभावित करने का आरोप लगाया था।
एसीबी एसपी निरंजन ने 2001 से 2016 तक अंचल में पदस्थापित रहे सभी अंचलाधिकारियों, सीओ व राजस्व कर्मचारी की जानकारी ली व उन्हें नोटिस देकर पूछताछ करने का निर्देश दिया। इसके साथ-साथ जमीन के सभी जमाबंदी धारक व विक्रेता को भी नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाने को कहा। एसपी ने पूछा कि 152 लोगों को 15 एकड़ 88 डिसमिल जमीन की जमाबंदी हुई तो जांच के लिए महज 30 जमाबंदी के मामले क्यों दिए गए। आखिर क्यों और किसके कहने पर 122 जमाबंदी के मामले को जांच से मुक्त रखा गया।
अंचल कार्यालय में पूछताछ के बाद एसीबी एसपी निरंजन केस के अनुसंधान पदाधिकारी उपेंद्र राय व नामकुम के वर्तमान अंचलाधिकारी मनोज कुमार, बीडीओ गौरी शंकर शर्मा (जिन्होंने घोटाले को लेकर नामकुम थाने में मुकदमा दर्ज कराया है), आरोपी सीआइ अनिल कुमार व राजस्व कर्मचारी अशोक सिंह के साथ स्थल निरीक्षण करने तुंबागुटू गए। वहां उन्होंने जमीन पर कब्जे का मुआयना किया। इस दौरान एसपी निरंजन ने सीओ से पूछा कि इतने बड़ा घोटाला आखिर हुआ कैसे, सीओ व सीआइ इसका जवाब नहीं दे पाए। उन्होंने जमीन जमाबंदी की पूरी प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी।
कोट
सेना जमीन भूमि घोटाले में जांच की दिशा की जानकारी लेने के लिए नामकुम अंचल कार्यालय गया था। इसके आगे मैं कुछ नहीं जानता।
निरंजन, एसपी, एसीबी
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