Wednesday, August 24, 2016

सेना जमीन घोटाले की जांच में पड़ रही आंच


- कुल 152 लोगों को 15 एकड़ 88 डिस्मिल जमीन की हुई जमाबंदी  - जांच के लिए एसीबी को दिये गये हैं मात्र 30 जमाबंदी की कॉपी  - 122 म्यूटेशन को जांच से आरोपी सर्कल इंस्पेक्टर ने रखा मुक्त

रांची : तुंबागुटू में सेना की जमीन की अवैध बिक्री व जमाबंदी के चर्चित मामले में रोज नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। इस संबंध में राष्ट्रपति के संज्ञान लेने के बाद झारखंड सरकार रेस हुई और जांच ने रफ्तार पकड़ी। जागरण के हाथ लगे दस्तावेज बता रहे हैं कि जिस प्रभारी अंचल निरीक्षक
(सीआइ) को नामकुम के तत्कालीन अंचलाधिकारी ने जांच के बाद आरोपी बताया था फिलहाल एसीबी जांच में वही सहयोग कर रहा। नामकुम की तत्कालीन अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुडू का कहना है कि मेरे जांच रिपोर्ट में छेड़छाड़ कर एक प्रभारी अंचल निरीक्षक अनिल कुमार ने अपना नाम हटाने के बाद उसे उच्चाधिकारियों को सौंपा, अब इसी आधार पर जांच कार्य चल रहा है। इससे जांच की दिशा  प्रभावित हो रही है। जान बूझकर उक्त आरोपी ने 152 में से मात्र 30 जमाबंदी के दस्तावेज एसीबी को सौंपा है, ताकि जांच में उस पर आंच न आए। हद तो यह हो गई कि 2014 में मामला प्रकाश में आने के बाद उक्त सीआइ अनिल कुमार द्वारा खाता नंबर 93 प्लाट नंबर 1574 के दर्जनों जमाबंदी पंजी टू में दर्ज कराई गई। अब जब नामकुम थाने से जांच के लिए मामला एसीबी को सौंपा गया है, तो उक्त आरोपी ही स्थल निरीक्षण कराने के साथ टीम को दस्तावेज मुहैया करा रहा है।

उपायुक्त ने मांगा था आरोप पत्र

सेना जमीन घोटाले के संबंध में झारखंड सरकार के निर्देश के बाद उपायुक्त रांची ने 31 मार्च को (पत्रांक 501) नामकुम अंचलाधिकारी कुमुदिनी टुडू को पत्र लिखा था।  इसमें तुंबागुटू मौजा के खाता नंबर 8, 98, 108 व 97 में सेना भूमि के गलत नामांतरण की अनुशंसा करने वाले राजस्व कर्मचारी व अंचल निरीक्षक के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए आरोप पत्र उपलब्ध कराने को कहा गया था। इसके आलोक में अंचलाधिकारी ने जांच के बाद राजस्व कर्मचारी मनोरथ भगत, जयंत विजय टोप्पो, पालन राम पांडेय(सेवानिवृत्त), प्रभारी अंचल निरीक्षक (सीआइ) धनंजय गुप्ता तथा राजस्व कर्मचारी सह तत्कालीन प्रभारी अंचल निरीक्षक अनिल कुमार पर विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की।
 रिपोर्ट भेजने के क्रम में हुई गड़बड़ी

सीओ द्वारा तैयार रिपोर्ट को उपायुक्त के पास भेजने के क्रम में इस रिपोर्ट के साथ छेड़छाड़ हुई और अनिल कुमार का नाम हटाने के बाद मात्र चार आरोपियों का नाम भेजा गया। इस तरह पांच आरोपी के बदले अब मात्र चार आरोपी रह गए और इसी आधार पर आगे की कार्रवाई बढ़ी। जिसमें एक राजस्व कर्मचारी जयंत विजय टोप्पो व तत्कालीन प्रभारी सीआई धनंजय गुप्ता के ऊपर विभागीय कार्रवाई हुई। अन्य आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कोट
मैंने जांच रिपेार्ट में उपयुक्त को पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा था। लेकिन, रिपोर्ट में छेड़छाड़ की गई और एक नाम हटा दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए कि किसने नाम हटाया।
कुमुदिनी टुडू, तत्कालीन अंचलाधिकारी नामकुम
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सेना की जमीन के मामले में जिसने भी दस्तावेजों से छेड़छाड़ की है, किसी भी कीमत पर उसे बख्शा नहीं जाएगा, कड़ी कार्रवाई होगी।
भू-राजस्व मंत्री, अमर बाउरी 

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