Sunday, January 30, 2011

कई एनकाउंटर के महारथी हैं डीएसपी अश्विनी

 लातेहार के लुहूर गांव में शुक्रवार अहले सुबह झारखंड पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि हासिल की। न सिर्फ नौ नक्सलियों को मौके पर मार गिराया, उनके शव और बड़ी संख्या में हथियार भी बरामद किए। अभियान के दौरान मौत और जिंदगी में काफी करीबी फासला था। पूरे अभियान में बेहद सक्रिय भूमिका निभाने वाले रांची निवासी एसडीपीओ अश्विनी कुमार सिन्हा ने बताया कि पुलिस को कोई नुकसान नहीं होने के पीछे अच्छी रणनीति, सावधानी और भगवान की कृपा रही। 2000 में बीपीएससी से डीएसपी बनने के बाद हमेशा उग्रवाद प्रभावित जिलों में रहने वाले अश्विनी बताते हैं कि इन जिलों में सफलता के लिए योजना, सावधानी और स्थानीय परिस्थिति के अनुकूल तत्काल निर्णय जरूरी होता है। दस साल के करियर में अब तक उन्होंने दस से ज्यादा बड़े एनकाउंटर में भाग लिया है। इसकी शुरूआत 16 मार्च 2001 में सिवान के सांसद शहाबुद्दीन के खिलाफ हुआ था। सांसद के गांव प्रतापपुर में हुए इस मुठभेड़ में नौ अपराधी मारे गए थे, और शहाबुद्दीन के खौफ का साम्राज्य टूटा था। इसके बाद, जनवरी 2002 में रोहतास के गायघाट खोई में नक्सलियों के बड़े ट्रेनिंग कैंप को धवस्त किया गया। मई 2003 में झारखंड कैडर मिलने के बाद इसी वर्ष अगस्त में हुसैनाबाद के सीताचुआं, 2005 में झुमरा पहाड़ी के अभियान में इनके नेतृत्व में बड़ी सफलता प्राप्त की गई। 2009 में बरवाडीह केचकी गांव में अकेले दम संघर्ष कर खुंखार उग्रवादी कारगिल को पकडऩा अपने जीवन की अहम उपलब्धि मानने वाले अश्विनी कुमार की शिक्षा स्थानीय सेंट जॉन्स स्कूल और सेंट जेवियर्स कॉलेज में हुई है।

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