Monday, January 24, 2011

दोहरे व्यक्तित्व से उच्च शिक्षा का बेड़ा गर्क

उच्च शिक्षण संस्थानों में पद पर बने रहने के लिए दोहरे व्यक्तित्व वाले लोगों की भरमार हो गई है। ऐसा ही ताजा उदाहरण इस्लामी शिक्षण संस्था 'दारुल उलूम देवबंदÓ के नए कुलपति मौलाना गुलाम मोहम्मद वस्तानवी ने प्रस्तुत किया है। कुलपति बनते ही उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की काफी प्रशंसा की कहा, मोदी के राज्य में काफी तेजी से विकास हो रहा है और इसका लाभ मुसलमानों को भी मिल रहा है। गुजरात सरकार की नौकरियों में भी मुसलमानों को स्थान मिल रहा है। अब इस ब्यान का जैसे ही देवबंद के छात्रों ने विरोध किया 'विद्वानÓ मौलाना वस्तानवी साहब पलट गए। छात्रों ने वस्तानवी के इस्तीफे की मांग की है। वस्तानवी ने देवबंद पहुंच कर अपने पूर्व के बयान पर सफाई देते हुए कहा कि मोदी को खुदा भी माफ नहीं करेगा। बावजूद इसके छात्रों का गुस्सा कम नहीं हो रहा वे वस्तानवी से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
वस्तुत: वस्तानवी को इस्तीफा दे देना चाहिए। दोहरे चरित्र के ऐसे लोगों को उच्च्च शिक्षा के उच्च्च पदों पर बैठने से वैचारिक भ्रष्टाचार बढ़ेगा। जो व्यक्ति अपने मूल विचार पर दृढ़ नहीं रह सके वह भला नौजवानों को चारित्रिक दृढ़ता की शिक्षा कैसे देगा।

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